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श्रद्धांजलि: डॉ ए .पी .जे. अब्दुल कलाम के प्रति

Posted On: 29 Jul, 2015 कविता,Hindi Sahitya,Others में

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एक महान खो गया,
सरल मन बालकों सा,
जीवन प्रकृत साधकों सा,
धी जरूरत देश को,
कुछ कहे बिन सो गया।
बस, अनन्त में खो गया।।

धर्म से पहचान था,
मानवता का प्राण था,
भूत या कि वर्तमान
देश का भगवान था।

जानता संघर्ष था,
संकटों को बेधकर,
उन्नति के शिखर पर
मात्र निज संकल्प से
किस विध पहुँचे अल्पशक्ति
यह उसे ही ज्ञात था।

देश की गरिमा बढ़ायी
संवर्धित कर शक्ति उसकी,
वह मिसाइल मैन था
अद्भुत व्यक्तित्व था,
विज्ञान पुजारी था वह कर्मठ
रक्षाशक्ति देश का
अभिनव प्रमाण था।

घनी बरौनियों के पीछे
छिपी हुई थी दूर दृष्टि,
सामने सदा उसके,
देश का निर्माण था।

प्रेरणा अबाध बन
प्रथम नागरिक देश का
खो जाता मुस्कान में
दीखता भविष्यउसको
देश के युवाओं में
निश्छल मन- बालकों में।

सच्चरित्रता बेमिसाल
देश का अनमोल लाल
सही अर्थ में था वही
धर्म निरपेक्षता का मिसाल
अन्यतम मशाल था।
खो गया वह कहीं
बिन कहे ही सो गया।
-
अहंकार शून्य था,।
चाहिए जो देशप्रेम
राजनेता के हृदय में
प्रेम वह घनीभूत था
विज्ञान नेता के हृदय में

एक सच्चा राष्ट्र भक्त
एक सच्चा ज्ञान भक्त,
सच्चा विज्ञान भक्त
युग निर्माता था वह सच्चा,
देश का सपूत वह।
वह महान खो गया
बस अचानक सो गया

अँजलि मे श्रद्धा-शब्द सुमन,
है उसे शत बार नमन।।
आशा सहाय 29-7-201

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
July 31, 2015

आदरणीय प्रिय आशा जी कमाल साहब के व्यक्तित्व को दर्शाती हर पंक्ति कमाल साहब अति राष्ट्रवादी थे | उनकी नजर मैं साइंस और देश दो ही लक्ष्य थे

ashasahay के द्वारा
July 31, 2015

आदरणीया शोभा जी,ह़दय के उद्गार थे ये । आपको बहुत धन्यवाद ।


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