चंद लहरें

Just another Jagranjunction Blogs weblog

117 Posts

326 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 21361 postid : 1296000

भारत को मंडित होने दो।

Posted On: 28 Nov, 2016 कविता,Hindi Sahitya में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

एक नवल भव्यता से अब तो
भारत को मंडित होने दो।
है जहाँ तलक दृष्टि उठती
यह विश्व अभी भी भव्य नहीं
दासत्व जहाँ हँसता रोता
और काला रँग कलुषित मन का
हर श्वेत हृदय काला करता
अब भी है शोषण शेष जहाँ
दम विश्व विकास का पर भरता
है न्याय का यह कैसा विद्रूप
अपराध कुलाँचे है भरता
कैसी मति गति कैसी नर की
आतंक मिटाने हेतु यहाँ
आतंक सहारा बनता है
परिवर्तन का संदेश मधुर
निज प्रेम भाव से भरने दो
यह है अप्रतिम वह भाव राग
इससे तन मन को बदलने दो
इस एक भव्यता से अब तो
भारत को मंडित होने दो।
रिश्तों के पँख पसारे ज्यों
पक्षी नभ में उड़ता जाए
दे देकर प्यार भरा अनुभव
चुन चुन संदेशे ले आए
उड़ने दो नभ में दूर तलक
निज नवल रँग भरे पँखों से
इस विश्व हृदय को हरने दो
एक विरल भव्यता से अब तो
भारत को मंडित होने दो।

आशा सहाय ।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
November 28, 2016

जय श्री राम मनीनीहा आशा जी भारत को मंडित होने दो बहुत सुन्दर प्रस्तुति ऍबहुत दिनों बाद समय आया जब देश फिर विश्व पटल पर अपनी छवि दाल सके इसके लिए प्रधानमंत्री मोदीजी के प्रयत्न सरहानीय है और उन्हें हमारा समर्थन देना चाइये.७० साल की समस्याओं को दूर करने में समय लगेगा.भावपूर्ण कविता के लिए आभार.

Shobha के द्वारा
November 30, 2016

प्रिय आदरणीय आशा जी आपके लेख तो उत्तम होते ही थे कविता भी उत्तम विचारों से परिपूर्ण है

ashasahay के द्वारा
December 1, 2016

नमस्कार श्री रमेश अग्रवाल जी, आपने सही कहा है।एक अच्छी टिप्पणी के लिए आभार।

ashasahay के द्वारा
December 1, 2016

बहुत धन्यवाद डॉ शोभा जी ,आपकी टिप्पणी के लिए आभार।


topic of the week



latest from jagran